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गुरुवार, नवंबर 15, 2018

ऐ  मेरे मन बता----------

ऐ  मेरे मन बता तेरा आइना क्या है,
हर पल कुछ बोल रहा है, तुफा है शायद उमड़ रहा है,
छोड़ किनारे जीवन में उतर रहा है.

ऐ  मेरे मन बता तेरा आइना क्या है
कभी धुप सा कभी छाव  सा कभी सागर की गहराई हैै ,
 ऐ   मेरे मन बता तेरा आईना क्या है.

तेज  नदी की धरा सा, बहता   है आवारा सा,
जरा जरा सा बहका सा किस खोज में रहता है ,
 ऐ मेरे मन बता तेरा आइना क्या है,

उठता गिरता लड़खड़ाता, मस्ती में झूमता खिलखिलाता।
तेरे चेहरे है कई फिर भी तू गुमनाम सा ,
 मेरे मन बता तेरा आईना क्या है
( मेरी कलमसे )

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