ऐ मेरे मन बता----------
ऐ मेरे मन बता तेरा आइना क्या है,हर पल कुछ बोल रहा है, तुफा है शायद उमड़ रहा है,
छोड़ किनारे जीवन में उतर रहा है.
ऐ मेरे मन बता तेरा आइना क्या है
कभी धुप सा कभी छाव सा कभी सागर की गहराई हैै ,
ऐ मेरे मन बता तेरा आईना क्या है.
तेज नदी की धरा सा, बहता है आवारा सा,
जरा जरा सा बहका सा किस खोज में रहता है ,
ऐ मेरे मन बता तेरा आइना क्या है,
उठता गिरता लड़खड़ाता, मस्ती में झूमता खिलखिलाता।
तेरे चेहरे है कई फिर भी तू गुमनाम सा ,
मेरे मन बता तेरा आईना क्या है
( मेरी कलमसे )
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