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बुधवार, नवंबर 01, 2023

आईना कभी झूट नहीं बोलता

 आईना कभी  झूट नहीं  बोलता 

आईना  कभी झूट  नहीं  बोलता ,

चेहरे के हरएक  राज है खोलता.

चेहरे को भी समय नुसार है ढालता ,

सुबह गहरी नींद से उठकर देखा , 

 चेहरा बहुत हसीन था , 

जैसे गुलाब का फूल था ,

दोपहर  में न जाने क्यों ,

आखो में उलझन थी ,

माथेपर शिकायतो की दरारे थी 

रात  होते होते यंही दरारे सिलवटों

 में बदल गई थी ,थकी थकी सी आंखे 

सारे  जंहा का राज खोल रही थी , 

आइना भी कितने रंग है बदलता ,

चेहरे के हर राज है खोलत। . 

मै ढूंढा करू सुबह का वह हसीं चेहरा ,

जैसा गुलाब का हो सहरा।

आखिर राज क्या है यह गहरा ,

क्या आईना  भी पढ़ लेता है मन का चेहरा ?!!!!

 


 

 

 

 

 

 

 


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