आईना कभी झूट नहीं बोलता
आईना कभी झूट नहीं बोलता ,
चेहरे के हरएक राज है खोलता.
चेहरे को भी समय नुसार है ढालता ,
सुबह गहरी नींद से उठकर देखा ,
चेहरा बहुत हसीन था ,
जैसे गुलाब का फूल था ,
दोपहर में न जाने क्यों ,
आखो में उलझन थी ,
माथेपर शिकायतो की दरारे थी
रात होते होते यंही दरारे सिलवटों
में बदल गई थी ,थकी थकी सी आंखे
सारे जंहा का राज खोल रही थी ,
आइना भी कितने रंग है बदलता ,
चेहरे के हर राज है खोलत। .
मै ढूंढा करू सुबह का वह हसीं चेहरा ,
जैसा गुलाब का हो सहरा।
आखिर राज क्या है यह गहरा ,
क्या आईना भी पढ़ लेता है मन का चेहरा ?!!!!
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