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सोमवार, जुलाई 03, 2023

खुशियो को महसूस कीजिये


खुशियों को महसूस कीजिये



 खुशियों  की धूपचांदनी आज मेरे अंगना उतर आई।
मैने दोनों हथेलियों मे  धूपचांदनी को भरना चाहा
वह छुईमुई सी होकर उड़ गयी , खुशिया कहाँ  बंधन में पलती  है!!!!!
मन आँगन में धीरे से उतर आती है ,बाँध के रखना चाहो तो हवा हो जाती है।
वह तो आसपास मंडराती रहती है, तितली की भांति,
बस ! उसे महसूस करने का नजरिया  हमें मिल जाये,
कुछ लम्हें बड़े हसीन  होते है, उन्हें याद  करने की जरूरत नही,
वह मन में उतर आते है, धूप  की चांदनी जैसे, और बस जाते है,
 मन के किनारों  पे कहीं ! ----- छाव बनकर , जीवन की युद्धभूमी
 में वंही छाव  शीतलता का अहसास दिलाती


if I can't give anything to 
others still one thing I can
 give that is pleasant smile










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