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सोमवार, जून 26, 2023

                                                                       
तूफान भीतर है. बाहर तो गहरी शांति है. समुद्र और धरती की गोद में रोज  ही कितने विस्फोट होते है, किसी  को पता भी नहीं चलता है.सतह पर रहने वालो  को लहरों से खेलना भाता है.जिस दिन यह भीतरी स्फोट उमड़कर  बाहर  आता  है. सुनामी बन जाता है. धरती कांप उठने पर कितने ही गावं उजड़ जाते है. तबाही आती है. इसीलिए मन के सुनामी को सहसा बाहर मत आने दीजिये क्यों के यह बाहर आने पर बाहर की गहरी शांति  को नष्ट करता है. संसार में इस समय हिंसा का जो भयानक रूप दिखाई  देता है. यह सब मन के भीतर हुए मानसिक  स्फोट है. जो उमड़कर बाहर आए है. वरना आज  भी बाहर एक गहरी शांति  है. निस्तब्ध मौन है

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 कर्म का फल मीठा होने के लिया कुछ देर इंतजार तो करना ही होगा. जिस प्रकार पेड़ पर लगा हुआ फल अनेक 
 अवस्था से गुजरकर और धूप हवा के थपेड़े सहन करके मीठे रस  को प्राप्त होता है. उसी प्रकार कर्म के फल को मीठा होने के लिए  इंतजार जरूरी है. इसे इस प्रकार भी देखे की विपदा की घड़ी का एक निश्चित समय तय है .
 उस तयशुदा घड़ी में आप उस विपदा के प्रभाव में रहेंगे कालावधि पूर्ण होने पर  विपदा का तूफान अपने आप शांत   हो जायेगा और ऐसा  जीवन भर चलता रहेगा धुप छाँव  की तरह मगर उस विपदा की अवस्था में हमने जैसे कर्म किये उसका फल वैसे ही मिलता है .
 

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