ऐसी भी बाते होती है---
ऐसी भी बाते होती है-----
शीशे के सपने पत्थर की दुनिया होती है
होटों पे हंसी आँखो में अश्क तैरते रहते है.
लबों पे ख़ामोशी दिलो में सैलाब होते है.
ऐसी भी बाते होती। .....
फूलों से नाजुक दिल कुम्हलाते रहते है.
ताउम्र घायल जखमो को हम सहलाते रहते है.
जीवन तो जीना सिख लेते है, मन को तड़पता छोड़ देते है
ऐसी भी बाते होती
सपनो के रास्ते तलाशते है सपने धुंदले हो जाते है
कुछ और ही पाना था कुछ और ही बन जाते है
ऐसी भी बाते होती है
भीड़ में क्या तलाशता है , जरा जरा सा पगला सा मन ये मेरा
खुद को ही ढूंढ़ता है खुद से अंजान राही अकेला।
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