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शुक्रवार, जून 09, 2023

श्रद्धा --- रेगिस्तान में छाव जैसी


 श्रद्दा रेगिस्तान में  छाव जैसी 


चिलचिलाती धूप  में पेड़ों की  छाव सुकून देती है,
प्यासे को पानी और भूखे को भोजन संतुष्ट करता है.
श्रुष्टी का स्वभाव है, देना,  और सिर्फ देना, बिना
कोइ फल की अपेक्षा रखते हुए -----
हम  जीवन में हर वक्त सुकून की तलाश में लगे  रहते है,
मगर ऐसा होता कहा है, हमारा जीवन तप्ति हुई धूप में रेगिस्तान
 जैसा बन जाता है, हमारी इच्छाये ,आकांशाए हमारे
जीवन पर बोझ बन जाती है,   जीवन रेगिस्तान बन जाता है,
 तब शुरू होती है ,एक नई खोज ----- शांति की खोज -----!.
जीवन संघर्ष में एक ऐसा चिराग मिल जाये ,जिसे रगड़ते ही
जीवन बोझ हल्का हो जाये सुकून मिल जाये, क्या ऐसा
 चिराग भी अस्तित्व में है--------------?
 उसका  अस्तिव शायद हम में ही है ,! हमारे आस पास, हमारे इर्द गिर्द !
वह है  श्रद्धा का चिराग, श्रद्धा अपने आप पर हो -----
जीवन जीने पर हो, तो जीवन सुरमई बन जाता है,श्रद्धा का दूसरा नाम विश्वास है ,
विश्वास है .तो सफलता भी है,
श्रद्धा और विश्वास से किया गया हर  काम सफलता
की और ले जाता है,
मन तड़पता रहता है, अहंकार में, क्रोध में,  इर्षा  में.
मगर जिस दिन श्रद्धा के बीज इस मन में अंकुरित होते है,
इन सभी अवगुणों का नाश होता है , मन निश्चित और निर्भय हो जाता है,
अपने आप पर पूरा भरोसा कर लेता है  आदमी -------
भारतीय परम्परा में प्रार्थना का बड़ा महत्व है, प्रार्थना
  में श्रद्धा निहीत है, प्रार्थना का फल तभी मिलता है जब
अंतर्मन तक प्रार्थना की पुकार सुनाई देती है ,  विश्व  के
सभी कार्यो में आज भी विश्वास और श्रद्धा मौजूद है जो
रेगिस्तान में छाव  जैसा कार्य कर  रही है,
प्रार्थना का मोल समझकार उसे जीवन में उतारना
बुद्धिमानी और समझदारी की और उठे कदम है।




        

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