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शनिवार, जून 10, 2023

 आँगन का पेड

हमारे आँगन मे एक बड़ा पेड़ था।  जिसमे बहूत सारे  लाल फूल आते थे। कई  सालों तक  यह  सिलसिला चलता  रहा। उस पेड़ को मैंने बड़े प्यार से पाला  था।   कई  लाल फूलों  से श्रृंगारित वह पेड मेरा दुलारा था.  मुझे उस  पेड़ से गहरा लगाव हो गया था. फिर अचानक  ऐसा भी समय आया की वह पेड़ सूखने  लगा।

उसकी  जडे  कमजोर हो गई. कई छोटे  जीव जन्तूने  उस पेड़ को अपना भोजन बना लिया था. नौबत यंहा  तक आई कि  उसे आखिर काटना ही पड़ा। मेरा उस पेड़ से गहरा रिश्ता था.मै  बहुत  व्याकुल मनोदशा में थी. 

कई दिन बीत  गए. फिर एक दिन मेरे ख़ुशी का ठिकाना न रहा ,जब  मैंने  देखा उस पेड़ की जड़ो में  कुछ नई कोपले निकल आई  थी। 

मेरी तरफ हसरत  भरी  नजरो से देख रही थी।   जैसे कह रही   हो "मेरी जड़ो में तुम्हारा प्यार छुपा था ना , देखो मै फिर से प्रगट हो ही गया 

रिश्तो में भी तो  गहरे लगाव की जड़े  होती है.  उन रिश्तो में भी कभी कभी दिमग  लग जाती है.भर भर के प्यार देनेवाला  वह पेड़ अचानक  सुख जाता है।  रिश्तो की जडे  तोड़ दी जाती है.. बड़ा दुःख होता है. मन व्याकुल हो जाता है. 

फिर अचानक नए रिश्ते  जुड़ जाते है।  नए अंदाज में ,! नए रूप में मन की धरती पर लहराते है. धीरे से   कानो में कह जाते है. "मै  वही हु रे पगली".नए रूप में नए अंदाज में।  पुराने रिश्ते कुछ सीख दे जाते।















 










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