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मंगलवार, सितंबर 21, 2021

स्वस्थिति मजबूत हो।

 

पार्ट १

                                               

जीवन एक चुनौती ( Life is challenge.) 

 
   कहानिया किताबे हम सभी पढ़ते रहते है.मगर ताज्जुब की बात यहं  है की अपने ही
जीवन की कहानी हम गढ़ते रहते है औरहमें पता भी नहीं होता है. जीवन की कहानी
 लिखते वक्त हाथ में कलम और स्याही नहीं रहती  है ना ही  कागज | कच्ची उम्र
से शुरू होने वाली यंह  कहानी, क्लाइमेक्स तक आतेआते नॉवेल  का रूप धारण कर लेती है.
वक्त करवट लेता रहता है.परिस्थिति बदलती रहती है.हर परिस्थिती   में हम
खुद को अंजान  पाते  है.हमारा रोल  समझ ही नहींपाते है  की दुसरी चुनौती सामने खड़ी  हो जाती है.
जीवन में उलझन यही  से शुरू हो जाती  है. हर परिस्थिती  में विचलित होते रहते है. अशांति की दलदल में खींचता
जाता है बेचारा मन!!! कभी भय  तो कभीअनिश्तिंता ,कभी अभाव तो कभी दबाव में जीवन ढोते  रहते है.
नकारात्मक परिस्थिया  हम पर हावी होती रहती है , हम परिस्थितीके बोझ के निचे दब जाते है. ऐसा इसलिए भी होता है की ( पर +स्थिति का चिंतन हम करते रहते है स्वस्थिति (स्व+स्थिति ) को नजरअंदाज
करते रहते है ,परिस्थिति के आगे स्वस्थिति अगर मजबूत हो तो परिस्थिती
चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो मोम  की तरह पिघल जाती है , अपना रोल समझना जरुरी है





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