सखाराम एक शहरी बाबु
किसीके
कहने पर सखाराम गांव से शहर आया था.उसे शहर में नौकरी भी मिल गई थी
.गांव से शहर आने पर उसने बहुत सी बाते सीखी थी. शिष्टाचार क्या होता है,
वंह जान गया था .शिष्टाचार को शिष्टाचार न कहते हुए 'एटिकेट्स' कहने लगा
था. गांव से शहर आने पर ,पहली बार वह किसी होटल में गया था. वहा के सफेद
वर्दी धारी ने उसे सलाम मार दिया था. तभी से थोडा फुला हुआ था. अपने दस
बाय दस के कमरे में उसने एक पलंग खरीद लिया था. वह दिन में और रात में
उसी पर सोता था. अपने किराए के कमरे में, निचे जमीन वाला भाग याने के
ग्राउंड फ्लोअर उसने, चूहा ,. छिपकली, काक्रोच, आदि को बिन किराए से दे रखा
था. घर में वहं स्लीपर पहनकर घूमता था. जमीन से उसका रिश्ता टूट चूका था.
छोटे मोटे एटिकेट्स तो उसने बहुत जल्दी सिख लिए थे. रंग गोरा होने के लिए उसने कई क्रीम इस्तेमाल किये थे. दांत साफ करने के लिए बबूल के दातुन की जगह टूथ पेस्ट और ब्रश ने ली थी. पेट भले ही आधा हो, पर कपड़ो पर इस्त्री पूरी होनी चाहिए, ऐसा उसका मानना था. कभी कभार एखाद पेग लेने में कोइ हर्ज नहीं ऐसा भी उसका मानना था. अमीर आदमी बनना उसका प्रमुख सपना था. अमीर आदमी बनने के लिए उसने बहुतसे हत्कंडे अपनाए'. पर निराशा ही हाथ लगी थी तब उसके दोस्त ने उसे सलाह दी थी.'पैसा कमाना हो ,तो थोडा टेढ़ा रास्ता धुन्ड़ना पड़ेगा मेरे यार'! तभी से अपनी दोस्त की दी हुई सलाह पर चल रहा है.दोस्त से ट्रेनिंग ले रहा है .
आजकल उसने एक कालर टी.व्. ख़रीदा है .रोज रात के दो बजे तक पिक्चर देखता है. सुभह देरी से उठता है. कभी कभी बिना नहाये ही इस्त्र के कपडे पहनकर कामपर चला जाता है. छुट्टी के दिन दिनभर टी.व्. देखता है. जिस में कभी गांव के दर्शन होते है. धरती की गोद में अठखेलिया करते उन गावं के बच्चो में वहं अपने को धुन्ड़ता है. उन बच्चो को देख कर उसकी बुझी बुझी सी आखो में चमक आती है. मक्का व् बाजरे के लहलहाते खेत देखकर, उसको अम्मा के हाथ का वह लजीज खाना याद आता है, तब वह टी. व्. बंद कर के सो जाता है.
छोटे मोटे एटिकेट्स तो उसने बहुत जल्दी सिख लिए थे. रंग गोरा होने के लिए उसने कई क्रीम इस्तेमाल किये थे. दांत साफ करने के लिए बबूल के दातुन की जगह टूथ पेस्ट और ब्रश ने ली थी. पेट भले ही आधा हो, पर कपड़ो पर इस्त्री पूरी होनी चाहिए, ऐसा उसका मानना था. कभी कभार एखाद पेग लेने में कोइ हर्ज नहीं ऐसा भी उसका मानना था. अमीर आदमी बनना उसका प्रमुख सपना था. अमीर आदमी बनने के लिए उसने बहुतसे हत्कंडे अपनाए'. पर निराशा ही हाथ लगी थी तब उसके दोस्त ने उसे सलाह दी थी.'पैसा कमाना हो ,तो थोडा टेढ़ा रास्ता धुन्ड़ना पड़ेगा मेरे यार'! तभी से अपनी दोस्त की दी हुई सलाह पर चल रहा है.दोस्त से ट्रेनिंग ले रहा है .
आजकल उसने एक कालर टी.व्. ख़रीदा है .रोज रात के दो बजे तक पिक्चर देखता है. सुभह देरी से उठता है. कभी कभी बिना नहाये ही इस्त्र के कपडे पहनकर कामपर चला जाता है. छुट्टी के दिन दिनभर टी.व्. देखता है. जिस में कभी गांव के दर्शन होते है. धरती की गोद में अठखेलिया करते उन गावं के बच्चो में वहं अपने को धुन्ड़ता है. उन बच्चो को देख कर उसकी बुझी बुझी सी आखो में चमक आती है. मक्का व् बाजरे के लहलहाते खेत देखकर, उसको अम्मा के हाथ का वह लजीज खाना याद आता है, तब वह टी. व्. बंद कर के सो जाता है.
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